Heaps of garbage litter Pakka Khera village of karnal
Karnal News : करनाल जिले के मूनक खंड का गांव पक्का खेड़ा इन दिनों अव्यवस्था और गंदगी से जूझ रहा है। गांव में जगह-जगह फैले कूड़े-कर्कट के ढेर ( Heaps of garbage ) और नालों की दुर्दशा ने ग्रामीणों का जीना मुश्किल कर दिया है।
गांव के राजकीय स्कूल की दीवार के साथ लगता नाला पूरी तरह अवरुद्ध पड़ा है जिससे दुर्गंध और मच्छरों की भरमार हो गई है। स्कूली बच्चे दुर्गंध से परेशान हैं।
ग्रामीण नाथू राम ने बताया कि सरपंच की लापरवाही के कारण गांव में साफ-सफाई नाममात्र की गई है। नालों पर उगी घास और झाड़ियों ने न केवल स्कूल बल्कि मुख्य मार्ग की सुंदरता को भी बिगाड़ दिया है। उन्होंने कहा कि गांव की आबादी के हिसाब से 2 सफाई कर्मचारी नियुक्त हैं, फिर भी पंचायत की अनदेखी के चलते गांव की स्थिति दिन-ब-दिन बदतर होती जा रही है।
गांव के स्कूल की दीवारों पर बने महापुरुषों के चित्र संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर, शहीद-ए-आजम भगत सिंह और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम और लिखे स्लोगन अब खराब निर्माण कार्य और सीमेंट के झड़ने के कारण लगभग मिट चुके हैं।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि ठेकेदार की कंजूसी और घटिया सामग्री के कारण दीवारों पर चढ़ाई गई सीमैंट परत कुछ ही महीनों में उखड़ गई जिससे महापुरुषों की तस्वीरें धुंधली हो गई हैं और आधे से ज्यादा मिट गई। ग्रामीणों ने कहा कि पक्का खेड़ा से बांसा जाने वाले मार्ग के साथ लगता नाला भी आधे से ज्यादा अवरुद्ध पड़ा है जिससे बरसात या गंदे पानी की निकासी न होने से सड़कों पर जलभराव की स्थिति बन जाती है।
उन्होंने बताया कि गांव में मच्छर और मक्खियों की बढ़ती संख्या के कारण डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है परंतु जिम्मेदार अधिकारी व पंचायत प्रतिनिधि इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द गांव की सफाई व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए, अवरुद्ध नालों की सफाई करवाई जाए और स्कूल की दीवारों पर बनी महापुरुषों की तस्वीरों का पुनर्निर्माण किया जाए ताकि विद्यार्थियों में प्रेरणा का भाव बना रहे।
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