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हिसार कोर्ट का फैसला : किसान आंदोलन में जाम लगाने के मामले में दो बरी; नारनौंद क्षेत्र के दो किसान भगोड़े घोषित, kisan Andolan Hisar

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Kisan Andolan Hisar Court faisla road jam Case


करीब आठ साल पहले गांव के बस स्टैंड के समीप मुख्य मार्ग को किया था जाम


Kisan Andolan Hisar : किसान आंदोलन के दौरान राजली गांव के बस स्टैंड पर मुख्य मार्ग जाम करने के आरोप में करीब आठ साल पहले किसानों पर दर्ज किए गए एक केस में न्यायिक दंडाधिकारी सुनील कुमार की अदालत ने दो किसान नेताओं को बरी कर दिया है। जबकि इस मामले में नारनौंद क्षेत्र के दो किसान नेताओं को अदालत ने भगोड़ा घोषित किया गया है।

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इस बारे में बरवाला थाना ने 21 जून, 2017 को हवलदार जयदीप सिंह की शिकायत पर किसान संघर्ष समिति के सदस्यों मिर्चपुर गांव निवासी प्रदीप प्रधान, राजली गांव निवासी कृष्ण, मिलकपुर गांव निवासी रणधीर और गुराना गांव निवासी भीरा और 35-40 अन्य के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 147, 149, 283 और 341 के तहत मामला दर्ज किया था। ( Hisar News Today in Hindi )

 

 


पुलिस को दी शिकायत में हवलदार ने बताया था कि वह अन्य पुलिस कर्मिचारियों के साथ कानून व्यवस्था की ड्यूटी पर राजली बस स्टैंड पर मौजूद था कि किसान संघर्ष समिति के सदस्यों मिर्चपुर गांव निवासी प्रदीप प्रधान, राजली गांव निवासी कृष्ण, मिलकपुर गांव निवासी रणधीर और गुराना गांव निवासी भीरा और 35-40 अन्य ने मुख्य मार्ग पर जाम लगाया हुआ था। जाम के कारण आने-जाने वाले व्यक्तियों व वाहनों को आवागमन में बाधा हो रही थी और आजमन परेशानी का सामना कर रहे थे।

 


जांच के दौरान पुलिस ने प्रदीप प्रधान, रणधीर, भीरा और कृष्ण के खिलाफ अदालत में चालान दिए। बाद में अदालत के नोटिस पर दो किसान नेता कृष्ण और धर्मबीर उर्फ भीरा अदालत में पेश हुए और अपनी जमानत करवाई। वहीं किसान नेता मिर्चपुर गांव निवासी प्रदीप प्रधान और मिलकपुर गांव निवासी रणधीर को अदालत ने भगोड़ा घोषित किया हुआ है। जबकि इस मामले में अदालत ने सबूतों के अभाव में राजली गांव निवासी कृष्ण और गुराना गांव निवासी धर्मबीर उर्फ भीरा को बरी कर दिया।


आरोपियों को पहचान नहीं पाया जांच अधिकारी: नवीन राजली


बचाव पक्ष के अधिवक्ता नवीन राजली ने बताया कि इस मामले में गवाही के दौरान जांच अधिकारी आरोपियों की ना तो सही पहचान कर पाया और और पुलिस का एक गवाह अपनी गवाही से मुकर गया। इसी आधार पर अदालत ने दोनों किसान नेताओं को बरी कर दिया। उन्होंने बताया कि किसान आंदोलन के दौरान किसानों के खिलाफ दर्ज किए गए केस निशुल्क लडऩे की घोषणा की थी और इस केस में भी उन्होंने किसानों से कोई फीस नहीं ली थी।

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