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हिसार में किसानों का शक्ति प्रदर्शन: अमेरिकी व्यापार समझौतों की प्रतियां फूंकी ( Latest News Hisar )

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Latest News Hisar : rashtriy vyakti hadtal kisan protest       


Latest News Hisar: ट्रेड यूनियनों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल के समर्थन में उतरे किसानों ने अमेरिकी डील के विरोध में प्रधानमंत्री मोदी, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का पुतला फूंककर अपना रोष प्रकट किया। प्रदर्शन की अध्यक्षता ताऊ सूरजभान डाया, शमशेर नंबरदार और करतार सिवाच ने संयुक्त रूप से की।


किसानों के विरोध के मुख्य मुद्दे: क्यों गुस्से में हैं किसान?


अमेरिकी दबाव और फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA): किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार अमेरिकी दबाव में खेती को विदेशी कंपनियों के हवाले कर रही है। यह समझौता छोटे किसानों के लिए ‘मौत के वारंट’ जैसा है। वहीं अमेरिका के साथ हुई इस डील से छोटे व्यापारियों और मजदूरों को भी काफी नुकसान झेलना पड़ेगा। क्योंकि भारत में अमेरिका का कारोबार बढ़ने से किसानों की आमदनी घटेगा। वहीं मजदूर को उनकी मेहनत के पसीने की कोई कदर नहीं रहेगी और उनका शोषण होगा। इसके अलावा छोटे व्यापारियों को भी इस डील से काफी नुकसान होगा और उनका व्यापार धंधा चौपट हो जाएगा।

 

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किसान नेताओं किसान नेताओं और ट्रेड यूनियनों के नेताओं ने कहा कि अमेरिका के दबाव में केंद्र सरकार एक बार फिर हमारे देश को गुलाम बनाने की दिशा में कदम उठा रही है जिसको बाहर देश का कोई भी नागरिक सहन नहीं करेगा। ब्रिटिश इंडिया कंपनी की तरह अमेरिकी कंपनी भी भारत के नागरिकों का शोषण करेंगे और धीरे-धीरे हमारा देश पर अमेरिका राज करने लगेगा। रूस से हमें सस्ते दामों पर तेल मिल रहा था लेकिन मोदी सरकार ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव में आकर अमेरिका से महंगा तेल खरीदने की सहमति दे दी है जिसका दबाव भारत के हर नागरिक पर पड़ने वाला है।


सस्ते आयात की मार: अमेरिका से सोयाबीन, मक्का और डेयरी उत्पादों पर आयात शुल्क घटाने की तैयारी है, जिससे भारतीय किसानों की फसलों के दाम मिट्टी में मिल जाएंगे।
कॉर्पोरेट गुलामी का खतरा: नेताओं ने कहा कि सरकार भारतीय कृषि और डेयरी क्षेत्र को बहुराष्ट्रीय कंपनियों की मंडी बनाना चाहती है। मजदूर विरोधी लेबर कोड: किसानों ने ट्रेड यूनियनों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर नए श्रम कानूनों का पुरजोर विरोध किया।


बड़ा ऐलान: कुरुक्षेत्र में ‘डेरा डालो-घेरा डालो’
पगड़ी संभाल जट्टा समिति के राज्य कमेटी सदस्य अनिल गोरछी ने सरकार को सीधी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि ये नीतियां वापस नहीं ली गईं, तो आंदोलन को देशव्यापी बनाया जाएगा। उन्होंने आगामी कार्यक्रम की घोषणा की:
आगामी आंदोलन: 23, 24 और 25 फरवरी 2026 को कुरुक्षेत्र में मुख्यमंत्री आवास पर तीन दिवसीय महापड़ाव डाला जाएगा।


ये रहे मौजूद :
प्रदर्शन में मुख्य रूप से मुकेश डाया, जसबीर डाया, भगत सिंह भालोटिया, राजेंद्र नेहरा, किरण शर्मा, अमित कादियान, मंजीत सहरावत, जय सिंह फौजी, ईश्वर ग्रेवाल सहित सैकड़ों किसान, महिलाएं और मजदूर शामिल हुए।

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